ये राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त तथाकथित धर्मगुरू देश की ज्वलंत समस्याओं के मामले में क्यों चुप रहते हैं? नारी शोषण या दुष्कृत्य के मामले में एक भी शब्द क्यों उनकी जबान से नहीं निकलता। जब भी बोलेंगे तो समाज को तोड़ने के लिए बोलेंगे। धर्म एक आस्था का विषय़ है। ऐसे धर्मगुरुओं को नहीं भूलना चाहिए कि जिस फकीर के विरुद्ध आज वे बयानबाजी कर रहे हैं उसके अनुयायियों की संख्या भी करोड़ों में है। आखिर ऐसी क्या आवश्यकता आ पड़ी थी कि अचानक शांत पानी मेैं विवादित बयान का कंकर फेंक कर समाज को उद्वेलित किया जा रहा है। यह विविधताओं वाला देश है, जिसमें हर कोई किसी भी मत को अपनाने के लिए स्वतंत्र है। यह ठेकेदारी प्रथा कब खत्म होगी? लानत है टीवी चैनलों पर जो ऐसे लोगों के बयान को दिन भर टीवी पर चला कर समाज में अनावश्यक उत्तेजना फैलाने का काम कर रहे हैं।